मध्य प्रदेश में बस पंजीयन घोटाला

2440 बसों का फर्जी खेल! नियम तोड़कर हुए रजिस्ट्रेशन, अब अफसरों पर कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश में 2440 बसों का अनियमित पंजीयन सामने आया है, जिसमें स्कूल और शैक्षिक संस्थानों की बसें शामिल हैं। जांच जारी है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

2440 बसों का फर्जी खेल! नियम तोड़कर हुए रजिस्ट्रेशन, अब अफसरों पर कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राज्य के 52 परिवहन कार्यालयों में नियमों की अनदेखी करते हुए 2440 नई बसों का पंजीयन किए जाने का मामला सामने आया है। परिवहन आयुक्त उमेश जोगा के पत्र से खुलासा हुआ है कि 1 सितंबर 2025 से लागू नए नियमों के बावजूद बिना अनिवार्य टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट के बसों का रजिस्ट्रेशन किया गया।

67 प्राइवेट सर्विस व्हीकल शामिल

इन 2440 वाहनों में 1487 यात्री बसें, 745 एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बसें, 141 स्कूल बसें और 67 प्राइवेट सर्विस व्हीकल शामिल हैं। मामले को लेकर मध्य प्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सहित परिवहन मंत्री, मुख्य सचिव और परिवहन सचिव को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज

एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन का कहना है कि बस मालिकों को तकनीकी नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती। ऐसे में यदि किसी बस का पंजीयन नियम विरुद्ध हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी परिवहन अधिकारियों की है, क्योंकि रजिस्ट्रेशन की अंतिम स्वीकृति उन्हीं के स्तर पर दी जाती है। उन्होंने दोषी अधिकारियों को निलंबित कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

चुके फॉर्म 22B के आधार पर कर दिया गया

दरअसल, केंद्र सरकार ने 6 मार्च 2024 को जारी अधिसूचना के तहत 1 सितंबर 2025 से फॉर्म 22B की व्यवस्था समाप्त कर दी थी। इसके बाद 13 या अधिक यात्री क्षमता वाली बसों के लिए मान्यता प्राप्त टेस्टिंग एजेंसी से टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया। इसके बावजूद कई बसों का पंजीयन पुराने और समाप्त किए जा चुके फॉर्म 22B के आधार पर कर दिया गया।

48 स्कूल बसों का पंजीयन

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 141 स्कूल बसें भी नियम विरुद्ध पंजीकृत हुईं। इनमें भोपाल में 51 और इंदौर में 48 स्कूल बसों का पंजीयन हुआ। परिवहन विभाग का कहना है कि मामले की जांच जारी है। यदि पंजीयन गलत पाया गया तो उसे निरस्त किया जाएगा और अधिकारियों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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