IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। वहीं कोर्ट ने मामले में 7 आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने इस मामले में कुल 16 आरोपियों और कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अब मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उस समय का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके रेल मंत्री रहते IRCTC के तहत आने वाले रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर में अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को निजी कंपनियों को कथित तौर पर नियमों की अनदेखी करते हुए लीज पर दिया गया। एजेंसियों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कुछ निजी कंपनियों को अनुचित फायदा पहुंचाया गया।
लालू परिवार पर क्या आरोप?
अदालत ने राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ अपराध से हुई कथित आय और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों को लेकर प्रथमदृष्टया मामला माना है। अदालत के मुताबिक, पटना की एक जमीन का लाभ लालू यादव के परिवार को मिला, जिसे जांच एजेंसियां 2005 से 2014 के बीच लालू यादव के प्रभाव से जुड़े कथित लेनदेन से जोड़ती हैं। उस दौरान लालू यादव रेल मंत्री थे। कोर्ट ने यह भी माना कि कथित टेंडर अनियमितताओं में लालू यादव की भूमिका और जानकारी की जांच के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
16 आरोपियों के खिलाफ थी चार्जशीट
ED ने मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा कई व्यक्तियों और कंपनियों को आरोपी बनाया था। चार्जशीट में लारा प्रोजेक्ट्स, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, सुजाता होटल्स, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलन और अभीषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड समेत अन्य नाम शामिल थे। इन 16 आरोपियों में से 7 को कोर्ट ने आरोपों से मुक्त कर दिया है, जबकि 9 के खिलाफ अब मुकदमा आगे चलेगा।
CBI ने भी किया था विरोध
लालू परिवार ने निचली अदालत के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय करने का रास्ता साफ हुआ था। इस याचिका का CBI ने विरोध किया था। जांच एजेंसी ने अदालत में कहा था कि उसके पास मामले से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं। CBI के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आए दस्तावेज कथित अनियमितताओं और आरोपों को मजबूत करते हैं।
लालू परिवार ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की ओर से इन आरोपों को लगातार खारिज किया गया है। उनका कहना है कि मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और उन्हें तथा उनके परिवार को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। अब कोर्ट द्वारा 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी, जहां मामले से जुड़े कानूनी पक्षों पर आगे की कार्रवाई होगी।