किसान हत्या मामले में 4 को फांसी

15 साल बाद इंसाफ: किसान की हत्या करने वाले 4 दोषियों को फांसी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसान राज सिंह की हत्या के मामले में 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई, जुर्माना भी लगाया गया।

By : नरेंद्र सिंह
15 साल बाद इंसाफ: किसान की हत्या करने वाले 4 दोषियों को फांसी

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के चर्चित राज सिंह किसान हत्याकांड में करीब 15 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने वर्ष 2011 में लूट के दौरान किसान राज सिंह की गोली मारकर हत्या करने वाले चार दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने अपराध को जघन्य और दुर्लभतम (Rarest of Rare) श्रेणी का मानते हुए चारों पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। साथ ही न्याय में हुई देरी पर भी चिंता जताई।

जन्माष्टमी पर बहन के घर जा रहे थे किसान

यह घटना 28 अगस्त 2011 की है। भोकरहेड़ी निवासी किसान राज सिंह अपने दोस्त बिजेंद्र सिंह के साथ बाइक से शामली के कुड़ाना गांव स्थित अपनी बहन के घर जन्माष्टमी पर कोथली देने जा रहे थे। रास्ते में चार बदमाशों ने दोनों को रोककर लूटपाट की। विरोध करने पर बदमाशों ने राज सिंह को गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने बिजेंद्र सिंह के साथ मारपीट कर उनके हाथ-पैर बांध दिए और उन्हें बाग में फेंककर फरार हो गए।

15 साल चली सुनवाई, चारों दोषी करार

मामले में राज सिंह के रिश्तेदार राहुल सिंह की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस जांच के बाद अजीत, सूरज उर्फ काला, अनिल और सुनील कश्यप को आरोपी बनाया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 12 गवाहों और अन्य साक्ष्य पेश किए। 9 जुलाई 2026 को अदालत ने चारों को दोषी करार दिया था।

कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

57 पन्नों के फैसले में न्यायालय ने कहा कि किसान की हत्या बेहद क्रूर और निर्मम तरीके से की गई। अदालत ने यह भी माना कि चारों दोषी आदतन अपराधी हैं और पहले भी गंभीर मामलों में सजा पा चुके हैं। इसी आधार पर अदालत ने सभी को फांसी की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर आर्थिक दंड भी लगाया।

न्याय में देरी पर कोर्ट की टिप्पणी

फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने न्यायिक प्रक्रिया में हुई देरी पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि अपराध और सजा के बीच लंबा अंतर कानून के प्रति अपराधियों का भय कम कर सकता है। कोर्ट ने माना कि 15 साल तक इस मुकदमे का लंबित रहना न्याय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

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