कुत्ते का मुखौटा, ‘डॉगेश जनता पार्टी’ का पोस्टर और 40 लाख का हिसाब,खंडवा में अनोखे प्रदर्शन ने मचाई सियासी हलचल!

कुत्ते का मुखौटा, ‘डॉगेश जनता पार्टी’ का पोस्टर और 40 लाख का हिसाब,खंडवा में अनोखे प्रदर्शन ने मचाई सियासी हलचल!

खंडवा में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं के चलते सियासी विवाद गहरा गया है। नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने जनसुनवाई में प्रदर्शन किया।

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खंडवा में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक उर्फ ‘मुल्लू’ राठौर ने मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। उन्होंने आवारा कुत्तों की समस्या और नसबंदी अभियान पर खर्च को लेकर प्रशासन से सवाल पूछे।

कुत्ते का मुखौटा पहनकर पहुंचा युवक

जनसुनवाई के दौरान दीपक राठौर एक युवक को कुत्ते का मुखौटा पहनाकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के जरिए उन्होंने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और लगातार सामने आ रही डॉग बाइट की घटनाओं पर ध्यान खींचने की कोशिश की। उनका आरोप है कि नसबंदी पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या कम होती नजर नहीं आ रही।

‘डॉगेश जनता पार्टी’ का पोस्टर वायरल

प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर ‘डॉगेश भाई’ और ‘डॉगेश जनता पार्टी’ नाम से कई पोस्टर और मीम वायरल होने लगे। इनमें “भौंकेंगे नहीं, हिसाब मांगेंगे!” जैसे व्यंग्यात्मक नारे लिखे गए हैं। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नसबंदी अभियान पर खर्च हुए करीब 40 लाख रुपये का हिसाब मांगने के साथ-साथ आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई जा रही है।

नसबंदी के आंकड़ों पर उठे सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि बड़ी संख्या में कुत्तों का नसबंदी अभियान चलाया गया है, तो शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम क्यों नहीं हो रही। उनका कहना है कि आम लोग लगातार डॉग बाइट की घटनाओं से परेशान हैं और प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

कलेक्टर ने प्रदर्शन पर जताई नाराजगी

खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने इस तरह के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पब्लिसिटी के लिए इस तरह के स्टंट करना उचित नहीं है। प्रशासन का कहना है कि समस्याओं को उठाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

निगम आयुक्त ने आरोपों को बताया निराधार

नगर निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत ने भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज किया। उनके अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक कुल 9,391 श्वानों का बंध्याकरण किया गया है। निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक इस प्रक्रिया में किसी भी कुत्ते की मौत दर्ज नहीं हुई है। आयुक्त ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोप निराधार हैं।

सोशल मीडिया पर अब भी गरमाया मुद्दा

प्रशासन के जवाब के बावजूद ‘डॉगेश भाई’ का मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है। एक तरफ प्रदर्शन को लेकर सियासी बहस छिड़ी है, तो दूसरी तरफ शहर के लोग आवारा कुत्तों और डॉग बाइट की समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। अब सवाल यही है कि खंडवा को आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे से राहत कब मिलेगी।