अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर के प्रबंधन को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर सहमति बनने के बाद नियुक्ति का औपचारिक ऐलान किया गया। जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन कार्यों में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।
ट्रस्ट में 3 नए सदस्यों की एंट्री
CEO की नियुक्ति के साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी भी शामिल किए गए हैं। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। इन तीनों की पृष्ठभूमि अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी रही है और ट्रस्ट में उनकी जिम्मेदारियां राम मंदिर से जुड़े कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगी।
कौन हैं नए ट्रस्टी?
मदन मोहन पांडेय पेशे से वकील हैं। राम जन्मभूमि मामले में उन्होंने रामलला की ओर से कानूनी पक्ष रखने में भूमिका निभाई थी। लंबे समय से मंदिर से जुड़े कानूनी मामलों में सक्रिय रहने के कारण उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महेश भागचंदका सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। वह विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार बताए जाते हैं और M2K समूह के अध्यक्ष हैं। राम मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान वह मुख्य यजमान भी रहे थे।
CEO पद के लिए 5,585 आवेदन
राम मंदिर के CEO पद के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन प्रक्रिया के दौरान इनमें से 16 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इसके बाद चयन समिति ने तीन नामों की सिफारिश श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजी थी। अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक में लिया गया और जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगी। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों के प्रशासनिक अनुभव और जिम्मेदारियों से जुड़े सवालों के अलावा धार्मिक क्षेत्र में उनके काम तथा भगवान राम के प्रति आस्था से जुड़े पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया।
मिलेगा नया प्रशासनिक ढांचा
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और मंदिर से जुड़े कामकाज के विस्तार को देखते हुए CEO की नियुक्ति को अहम कदम माना जा रहा है। CEO के स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और मंदिर से जुड़े संचालन को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी रहने की उम्मीद है।
दान विवाद के बाद चर्चा में ट्रस्ट
राम मंदिर ट्रस्ट इस साल दान से जुड़े एक विवाद को लेकर भी चर्चा में रहा था। जून में मंदिर में दान की राशि की गिनती से जुड़े कर्मचारियों पर कथित तौर पर रकम में गड़बड़ी करने के आरोप लगे थे। जांच में कर्मचारियों द्वारा कपड़ों और जूतों में पैसे छिपाने की बात सामने आई थी।मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी हुई थी। विवाद बढ़ने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे की चर्चा हुई। वहीं, SIT की जांच में 8 लोगों को आरोपी बनाया गया और सभी की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई। अब CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट की कोशिश मंदिर के प्रशासन और रोजमर्रा के प्रबंधन को और मजबूत करने की दिशा में मानी जा रही है।