झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने गुरुवार को दावा किया कि राज्य में सार्वजनिक परीक्षाएं कराने का ठेका एक कथित रूप से ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दिया गया, जिसने बिना औपचारिक टेंडर प्रक्रिया के परीक्षा से जुड़ा काम एक अन्य कंपनी को सौंप दिया।
भंडारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने TDPL नाम की कंपनी को परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी दी, जबकि बाद में इस कंपनी ने कथित तौर पर बिना औपचारिक टेंडर के परीक्षा संबंधी काम Picker Technology को आउटसोर्स कर दिया।
22 परीक्षाएं रद्द, 23 की जांच के आदेश
झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को 2014 के बाद झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC), झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और आउटसोर्स एजेंसी TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी थीं, जबकि 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए थे। यह कार्रवाई कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के लंबे समय से जारी आंदोलन के बीच हुई थी।
BJP प्रवक्ता ने दावा किया कि TDPL को परीक्षा आयोजन की पूरी जिम्मेदारी दी गई, जबकि वह कथित तौर पर ब्लैकलिस्टेड कंपनी थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि TDPL ने खुद कोई टेंडर जारी नहीं किया और परीक्षा का काम एक ऐसी कंपनी को सौंप दिया, जिसे उन्होंने ‘शेल कंपनी’ बताया।
‘कैश में हुआ लेन-देन’
प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई औपचारिक टेंडर जारी नहीं किया गया और न ही संभावित बोलीदाताओं को आमंत्रित किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि परीक्षा से संबंधित लेन-देन औपचारिक बैंकिंग माध्यम से नहीं, बल्कि नकद में किया गया।
BJP नेता ने इस पूरे मामले को प्रथम दृष्टया ‘क्विड प्रो क्वो’ यानी ‘लेन-देन के बदले लाभ’ का मामला बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को निशाने पर लिया। उन्होंने राहुल गांधी पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि इन आरोपों के सामने आने के बाद उनकी ‘नैतिक ऊंचाई’ कहां है।
CID के सामने बयान का हवाला
भंडारी ने कहा कि BJP के आरोप झारखंड CID के समक्ष दिए गए एक कथित बयान पर आधारित हैं। उनके मुताबिक, Picker Technology के निदेशक ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि टेंडर की कोई प्रति उपलब्ध नहीं थी और लेन-देन नकद में हुआ था।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राहुल गांधी से पूरे मामले पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करने की मांग की। BJP प्रवक्ता ने यह भी सवाल उठाया कि बिना औपचारिक टेंडर जारी किए Picker Technology को ठेका कैसे मिला और क्या मुख्यमंत्री कार्यालय या किसी मंत्री की ओर से कंपनी को ठेका देने के संबंध में कोई निर्देश दिया गया था।
भंडारी ने मंत्रियों और अधिकारियों की संभावित भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नकद लेन-देन हुआ था तो उस रकम का इस्तेमाल या हस्तांतरण आखिर कहां हुआ, इसकी भी जांच होनी चाहिए।