MMDR Act पर झारखंड सरकार का केंद्र से टकराव, खनिज अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी हेमंत सरकार

MMDR Act पर झारखंड सरकार का केंद्र से टकराव, खनिज अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी हेमंत सरकार

झारखंड सरकार और केंद्र के बीच MMDR Act के संशोधनों को लेकर विवाद बढ़ा, राज्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने का फैसला किया।

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MMDR Act पर झारखंड सरकार का केंद्र से टकराव, खनिज अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी हेमंत सरकार

झारखंड के खनिज संसाधनों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है। केंद्र सरकार के खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम यानी MMDR Act में किए गए संशोधनों के खिलाफ झारखंड सरकार ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।

राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया है कि खनिजों पर राज्य के अधिकार और आर्थिक हित सुरक्षित रखने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस फैसले पर अपनी सहमति दे दी है।

झारखण्ड सीएम हेमंत सोरेन

खनिज अधिकारों पर केंद्र के फैसले से नाराजगी

राज्य सरकार का कहना है कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधन यहां की जनता की संपत्ति हैं और इनसे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है। सरकार ने केंद्र के संशोधन को राज्यों के वित्तीय और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अधिकारों को कमजोर करने वाला कदम बताते हुए इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताया है।

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में राज्यों के अधिकारों को कमजोर करना देश की संघीय संरचना पर कुठाराघात है।

हाई लेवल बैठक में वित्तीय असर पर मंथन

इस मुद्दे पर वित्त मंत्री ने प्रोजेक्ट भवन स्थित अपने कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में वित्त सचिव प्रशांत कुमार, वाणिज्य-कर सचिव अमित कुमार और खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा मौजूद रहे।

अधिकारियों ने MMDR Act में हुए संशोधनों से राज्य के राजस्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव और इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी वित्त मंत्री के सामने रखी। बैठक के बाद मंत्री ने आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया।

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा

राज्य के खजाने पर पड़ेगा असर?

राज्य सरकार के मुताबिक, संशोधित प्रावधानों से खनिज संसाधनों पर राज्य की राजस्व वसूली प्रभावित हो सकती है। सरकार ने संशोधन की विभिन्न धाराओं का अध्ययन कर इसके संभावित आर्थिक प्रभावों का आकलन शुरू कर दिया है।

धारा 9डी का प्रभाव: राज्य सरकार के अनुसार, संशोधित धारा राजस्व संग्रहण के लिहाज से गंभीर असर डाल सकती है।

टैक्स और सेस लगाने के अधिकार पर असर: धारा 2 और 3 में खनिज वाली जमीन से जुड़े नए प्रावधानों से राज्य के टैक्स, सेस या लेवी लगाने के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। कल्याणकारी योजनाओं पर असर: सरकार का कहना है कि खनिज राजस्व में कमी आने पर विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के वित्तपोषण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

हेमंत सोरेन ने दी कानूनी लड़ाई को मंजूरी

बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मुद्दे पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार राज्य की जनता का है। उन्होंने राज्य के राजस्व और अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कानूनी और लोकतांत्रिक कदम उठाने पर सहमति जताई।

सुप्रीम कोर्ट

मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी में जुट गई है। संभावना है कि अगले सप्ताह तक याचिका दायर की जा सकती है। सरकार ने संकेत दिया है कि झारखंड के खनिज हितों की रक्षा के लिए वह हरसंभव कानूनी कदम उठाएगी।