झारखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार के उस आदेश के अमल पर रोक लगा दी, जिसके तहत 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं के जरिए नियुक्त सरकारी कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचनाएं जारी की गई थीं। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से फिलहाल उन हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी सरकारी नौकरी पर संकट मंडरा रहा था।

यह घटनाक्रम झारखंड में JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच सामने आया है।
22 परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने का फैसला
राज्य सरकार ने हाल ही में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रहे अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की रिपोर्ट के आधार पर 22 परीक्षाओं को रद्द करने का आदेश दिया था। कार्मिक विभाग ने सोमवार को हुई विशेष कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों के बाद मंगलवार देर रात इस संबंध में अधिसूचना जारी की।
सरकार के फैसले के मुताबिक, छह परीक्षाओं को स्थगित किया गया, जबकि 2014 के बाद आयोजित 17 अन्य परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में लाया गया। यह कार्रवाई JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही CID जांच के बीच की गई।
2,600 से अधिक कर्मचारियों पर मंडरा रहा था नौकरी का संकट
सरकार के फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई, जिन्होंने इन्हीं भर्ती परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी नौकरी हासिल की थी। घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकारी सेवा में शामिल हो चुके 2,600 से अधिक कर्मचारियों पर नौकरी गंवाने का खतरा पैदा हो गया था।
सरकार की अधिसूचनाओं के खिलाफ गुरुवार को झारखंड में अभ्यर्थियों का विरोध भी तेज हो गया। सरकारी नौकरी हासिल कर चुके उम्मीदवारों ने 22 परीक्षाओं को रद्द करने और अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश वापस लेने की मांग की।
अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
प्रदर्शन कर रहे कुछ अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया। उनका कहना था कि वे भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने से उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने योग्यता और मेरिट के आधार पर परीक्षा पास की है।
अभ्यर्थियों ने मांग की कि यदि किसी उम्मीदवार को किसी तरह की गड़बड़ी या नकल जैसी अनियमितता में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कार्रवाई की जाए। सभी सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है।
हाई कोर्ट के आदेश से फिलहाल राहत
हाई कोर्ट द्वारा सरकार की अधिसूचनाओं के अमल पर रोक लगाए जाने से 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के जरिए नियुक्त कर्मचारियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यह अंतरिम राहत है और मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी।
कोर्ट का हस्तक्षेप ऐसे समय हुआ है, जब भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर झारखंड में छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। अब हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार के फैसले और CID जांच से जुड़े मामले पर आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।