झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को अपने करीबी सहयोगी और बड़े भाई समान मित्र सुदिव्य कुमार उर्फ सोनू की अंतिम विदाई में शामिल हुए। गिरिडीह के हरसिंहरायडीह स्थित उनके आवास पर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने शोक-संतप्त परिजनों से मुलाकात की और गहरी संवेदना व्यक्त की। अंतिम यात्रा में शामिल हुए हेमंत सोरेन ने पार्थिव शरीर को कंधा भी दिया और श्मशान घाट पहुंचकर दाह संस्कार में शामिल हुए।
सुदिव्य कुमार के निधन से झामुमो (JMM) और उनके समर्थकों में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री ने उन्हें याद करते हुए कहा कि सोनू भैया का जाना अपूरणीय क्षति है और उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि अब वह सशरीर उनके बीच नहीं हैं।
हेमंत की राजनीतिक यात्रा में अहम भूमिका
सुदिव्य कुमार की भूमिका हेमंत सोरेन की राजनीतिक यात्रा के कई महत्वपूर्ण पड़ावों पर पर्दे के पीछे अहम रही। पार्टी नेताओं के मुताबिक, 2024 में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के दौरान संकट प्रबंधन से लेकर कल्पना सोरेन को राजनीतिक रूप से स्थापित करने की रणनीति तक में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
गांडेय उपचुनाव के दौरान कल्पना सोरेन के चुनावी अभियान की कमान संभालना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल रहा। यही वजह है कि उनके निधन को झामुमो परिवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
‘सरकार और पूरे राज्य के लिए दुखद घड़ी’
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि देर रात हृदयाघात के कारण सुदिव्य कुमार का आकस्मिक निधन हुआ। उन्होंने कहा कि यह सरकार और पूरे झारखंड के लिए अत्यंत दुखद घड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदिव्य कुमार राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में बेहद सक्रिय रहे। उन्होंने परिपक्वता और गंभीरता के साथ कई विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका असमय निधन बेहद पीड़ादायक है।
उन्होंने कहा, “सोनू भैया का जाना अपूरणीय क्षति है। विश्वास नहीं हो रहा कि अब वो सशरीर हमारे बीच नहीं हैं।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि झामुमो परिवार हमेशा सोनू भैया के परिवार के साथ खड़ा रहेगा।
‘दिल कैसे मान ले कि अब आप हमारे साथ नहीं’
हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी सुदिव्य कुमार को भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि शरीर को अग्नि को सौंप दिया गया, लेकिन अपने बड़े भाई समान मित्र को अकेला छोड़ना मन स्वीकार नहीं कर पा रहा।
मुख्यमंत्री ने लिखा कि अंतिम विदाई के उस क्षण में लगा जैसे समय ठहर गया हो। उनकी मुस्कुराती छवि, स्नेह और अपनापन बार-बार आंखों के सामने आता रहा। उन्होंने कहा कि कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं होते और सुदिव्य उनके लिए ऐसा ही रिश्ता थे।
हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार का स्नेह, उनकी बातें, संघर्ष और साथ बिताया हर पल हमेशा यादों में जीवित रहेगा। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “भैया, आपको विदा तो कर दिया, लेकिन दिल कैसे मान ले कि अब आप हमारे साथ नहीं हैं। आपकी कमी हमेशा खलेगी। आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।”