रक्षाबंधन के पर्व पर इंदौर एक बार फिर अपनी अनूठी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा से देशभर का ध्यान खींचने की तैयारी में है। खजराना गणेश मंदिर में इस बार भगवान गणेश को 40×40 इंच की विशाल ‘सनातन राखी’ अर्पित की जाएगी। पालरेचा परिवार पिछले 24 वर्षों से इस परंपरा को निभाता आ रहा है।
ढाई महीने से तैयार हो रही भव्य राखी
इस विशेष राखी को तैयार करने में परिवार के सदस्य करीब ढाई महीने से जुटे हैं। पिछले वर्षों में समुद्र मंथन, 12 ज्योतिर्लिंग, बेटी बचाओ, गंगाजल और नदियों जैसे धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर आधारित राखियां तैयार की गई हैं। इस बार भी राखी में आस्था के साथ राष्ट्रीय चेतना का संदेश देने की कोशिश की गई है।
‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर खास थीम
इस वर्ष राखी की थीम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर आधारित है। इसके जरिए राष्ट्रीय गौरव, सनातन संस्कृति और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देने की तैयारी है। राखी को केवल धार्मिक प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर तैयार किया जा रहा है।
कमल पुष्प में दिखेगा सनातन वैभव
विशाल राखी को कमल पुष्प के आकार में तैयार किया जा रहा है। इसमें बाबा महाकाल, भगवान जगन्नाथ, मां महाकाली और महालक्ष्मी जैसे धार्मिक प्रतीकों को स्थान दिया गया है। महाकाल के जरिए सिंहस्थ और महाकाल लोक की भव्यता, जबकि भगवान जगन्नाथ के माध्यम से सांस्कृतिक एकता का संदेश देने की कोशिश की गई है।
चार शहरों से आई विशेष सामग्री
राखी की सजावट के लिए कोलकाता, जयपुर, मुंबई और सूरत से मोती, नग, सितारे और जरदोजी की विशेष सामग्री मंगाई गई है। कारीगर और परिवार के सदस्य मिलकर इसे अंतिम रूप दे रहे हैं।
24 साल पुरानी परंपरा का नया संदेश
पालरेचा परिवार की यह परंपरा 24 वर्षों से जारी है। हर साल राखी के जरिए किसी खास सामाजिक या राष्ट्रीय विषय को सामने लाया जाता है। इस बार 40 इंच की विशाल राखी में सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय गौरव और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों की थीम को एक साथ पिरोया गया है। रक्षाबंधन पर खजराना गणेश के दरबार में यह राखी आस्था और सांस्कृतिक चेतना का खास आकर्षण बनेगी।