हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सुरक्षा को लेकर रेवाड़ी में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार रात मुख्यमंत्री का काफिला शहर के पॉश गढ़ी बोलनी रोड पर करीब डेढ़ किलोमीटर तक अंधेरे में गुजरता रहा। सड़क पर स्ट्रीट लाइटें बंद होने के कारण पूरा रास्ता अंधेरे में डूबा हुआ था। इस दौरान किसी व्यक्ति ने काफिले का वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने भी मामले का संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासनिक स्तर पर भी इसे गंभीरता से देखा जा रहा है।
हाफ मैराथन में शामिल होने पहुंचे थे CM
दरअसल, रविवार को रेवाड़ी में हाफ मैराथन का आयोजन किया गया था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने के लिए शनिवार देर रात ही रेवाड़ी पहुंच गए थे। शहर पहुंचने के बाद वह अमंगनी सोसाइटी में आयोजित रात्रिभोज में शामिल होने गए।
बताया गया कि राजेश पायलट चौक से अमंगनी सोसाइटी तक जाने वाली सड़क पर उस समय स्ट्रीट लाइटें बंद थीं। मुख्यमंत्री का काफिला जब इस रास्ते से गुजरा तो करीब डेढ़ किलोमीटर तक सड़क पर अंधेरा पसरा रहा। बताया गया कि अचानक सामने आए इस हालात से कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात अधिकारियों में भी चिंता की स्थिति पैदा हो गई।
वायरल वीडियो ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
काफिले के गुजरने के दौरान किसी व्यक्ति ने अंधेरे में चल रहे वाहनों का वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
लोगों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री के दौरे की जानकारी पहले से प्रशासन के पास थी, तब उनके रूट पर स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं की गई। मामला केवल यातायात व्यवस्था से जुड़ा नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा से भी संबंधित है।
कई महीनों से खराब हैं स्ट्रीट लाइटें
जिस सड़क का वीडियो सामने आया है, वहां कई पॉश सोसाइटी और सेक्टर स्थित हैं। बताया जाता है कि इलाके में कुछ जगह जमीन की कीमत करीब एक लाख रुपये प्रति गज तक है। इसके बावजूद मुख्य सड़क पर लगी स्ट्रीट लाइटें कथित तौर पर कई महीनों से खराब हैं।
इस सड़क का एक हिस्सा नगर परिषद और दूसरा हिस्सा लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन आता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्ट्रीट लाइटों को ठीक कराने को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
मेंटेनेंस पर हर साल लाखों रुपये खर्च
जानकारी के मुताबिक, नगर परिषद शहर में लगी स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव पर हर साल 30 लाख रुपये से अधिक खर्च करती है। ऐसे में मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने वाले प्रमुख मार्ग पर लंबे समय तक अंधेरा रहने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब स्थानीय विधायक द्वारा अधिकारियों से जवाब मांगे जाने के बाद यह देखना अहम होगा कि जिम्मेदारी किसकी तय होती है और खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।