उज्जैन के महाकाल मंदिर में बुधवार को ओंकारेश्वर से आए कांवड़ियों के हंगामे का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, करीब 100 दर्शनार्थी कांवड़ लेकर महाकाल मंदिर पहुंचे थे। नंदी हॉल में प्रवेश को लेकर विवाद बढ़ गया और कांवड़ियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर जाने की कोशिश की। इस दौरान मंदिर के तीन सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।
बैरिकेडिंग कूदकर आगे बढ़े कांवड़िए
बताया जा रहा है कि कांवड़िए पहली बैरिकेडिंग पार करने के बाद नंदी हॉल की ओर बढ़ने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे आगे बढ़ते रहे। इसके बाद कई कांवड़िए बैरिकेडिंग कूदकर अंदर जाने लगे। उन्हें रोकने के दौरान बैरिकेडिंग सुरक्षाकर्मियों पर गिर गई, जिससे कुछ कर्मचारी घायल हो गए।
हाथापाई में तीन सुरक्षाकर्मी घायल
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार, घटना के दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई और मारपीट भी हुई। इस पूरे घटनाक्रम में तीन सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। इनमें से दो को पैर और सिर में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
दानपेटियों को हटाने का भी आरोप
मंदिर प्रबंध समिति का आरोप है कि कुछ उपद्रवी लोगों ने मंदिर की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की। समिति के मुताबिक, बैरिकेडिंग और अन्य व्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाने के साथ दानपेटियों को इधर-उधर करने का प्रयास भी किया गया।
गर्भगृह में प्रवेश की कोशिश का दावा
मंदिर समिति के अनुसार, कुछ लोगों ने अनधिकृत रूप से गर्भगृह में प्रवेश करने की भी कोशिश की। घटना के दौरान मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई और श्रद्धालुओं की सामान्य दर्शन व्यवस्था में भी व्यवधान पैदा हुआ। मामले से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कांवड़िए बजरंग दल और VHP की टी-शर्ट में पहुंचे
जानकारी के अनुसार, ओंकारेश्वर के खेड़ीघाट से आए कांवड़ियों में कई लोग बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के नाम वाली टी-शर्ट पहने हुए थे। हालांकि, घटना में शामिल लोगों की भूमिका और पूरे विवाद की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मंदिर समिति ने शुरू की कार्रवाई
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने घटना को गंभीरता से लिया है। समिति के अनुसार, हंगामे में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पहचान होने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। समिति का कहना है कि मंदिर की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।