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बस्तर का गोगुंड़ा गांव: विकास के रंग में रंग रहा 40 साल का नक्सली गढ़ 

By : Narendra Singh
बस्तर का गोगुंड़ा गांव: विकास के रंग में रंग रहा 40 साल का नक्सली गढ़ 

बस्तर का गोगुंड़ा गांव से जुड़े 29 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

बस्तर का गोगुंड़ा गांव: चार दशकों तक नक्सलियों का गढ़ रहे सुकमा जिले का गोगुंड़ा गांव अब धीरे-धीरे विकास और शांति की राह पर कदम बढ़ा रहा है। बुधवार को यहां से जुड़े 29 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने का ऐतिहासिक कदम उठाया।

मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला

जिला मुख्यालय स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय में इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण और सीआरपीएफ अधिकारी हिमांशु लोहानी की उपस्थिति में यह प्रक्रिया पूरी हुई। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश नक्सली स्थानीय स्तर पर संगठन की मदद कर रहे थे, लेकिन अब उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। Also Read-today bastar news: बस्तर में गरीबों का राशन सड़ा, चिंतलनार में 35 लाख का चावल यूं ही सड़ गया

बस्तर का गोगुंड़ा गांव: पहाड़ी इलाके की कठिनाईयां

गोगुंड़ा गांव भौगोलिक दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण है। यह पूरी तरह पहाड़ी क्षेत्र में बसा है और नक्सलियों के लिए हमेशा सुरक्षित गढ़ माना जाता था। यहां तक पहुंचने के लिए सुरक्षा बलों को 8 किलोमीटर पैदल कठिन रास्ता तय करना पड़ता था। घने जंगल, खड़ी पहाड़ियाँ और ऊंची चोटियाँ कभी माओवादियों के लिए सुरक्षित ठिकाना रही हैं. हालांकि, प्रशासन ने हाल ही में नए कैंप और सड़कें बनाकर इस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया। इसके बाद स्थानीय स्तर पर कई माओवादी भाग गए और कुछ ने आत्मसमर्पण किया। Also Read-CM Vishnu Dev Sai meets Yuva Ratna Award recipients: CM विष्णु देव साय ने की

सरकारी योजनाओं और सुरक्षा का असर

कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण लगातार वहां मौजूद हैं. उनका मानना है कि प्रशासन की सक्रियता और जनहित की योजनाओं की पहुंच से स्थानीय युवा अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, हिंसा नहीं, विकास ही भविष्य है। जो युवा शांति और विकास की राह अपनाते हैं, उन्हें सम्मान और सुरक्षित जीवन मिलेगा।
अब बंदूक नहीं विकास की बात
सुरक्षा शिविरों, प्रशासन की मौजूदगी और विकास योजनाओं की वजह से अब ग्रामीणों में भी सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। ग्रामीण अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को लेकर अधिक आश्वस्त हैं। गांव में अब विकास की बयार बह रही है.

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