झारखंड में आदिवासी महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ सामने आ रही दुष्कर्म की घटनाओं तथा JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले के विरोध में आंदोलन करने वाले छात्रों पर दर्ज मुकदमों को लेकर भाजपा नेत्री सीता सोरेन ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर किए गए दो अलग-अलग पोस्ट में उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी की।
हजारीबाग के कटकमदाग में एक आदिवासी महिला के साथ कथित दुष्कर्म और उसके साथ बर्बर मारपीट कर पैर तोड़ दिए जाने की घटना पर सीता सोरेन ने कहा कि झारखंड की कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने घटना को ‘रूह कंपाने वाली’ बताते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
धनबाद में भी आदिवासी किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म
सीता सोरेन ने धनबाद में आदिवासी किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, हजारीबाग की घटना से तीन दिन पहले धनबाद में चार युवकों ने एक आदिवासी किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खुद को ‘आदिवासी हितैषी’ बताने वाली सरकार के कार्यकाल में बहन-बेटियां घर में भी सुरक्षित नहीं हैं और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। सीता सोरेन ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए। साथ ही उन्होंने पीड़िता को तत्काल उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा और मुआवजा देने की मांग की।
सीता सोरेन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी हैं। वह जामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं और फिलहाल भाजपा में हैं।
छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग
सीता सोरेन ने JPSC और JSSC-CGL परीक्षा में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले युवाओं पर दर्ज मुकदमों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भी लिखा है। उन्होंने पत्र की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार से इन मुकदमों को अविलंब वापस लेने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग उठाना युवाओं का लोकतांत्रिक अधिकार है। ऐसे में आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को संवेदनशील फैसला लेना चाहिए।
हमारे झारखंड के होनहार युवा JPSC और JSSC-CGL परीक्षा में सुधार के लिए लंबे समय से सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे। व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करने वाले इन युवाओं पर मुकदमा चलाना अन्यायपूर्ण है।
— Sita Soren (@SitaSorenMLA) September 4, 2026
माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, मेरा आपसे आग्रह है कि इन युवाओं पर दर्ज… pic.twitter.com/3baGQWSK0C
‘प्रदर्शन का मकसद कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं था’
सीता सोरेन ने पत्र में कहा कि झारखंड के हजारों युवा और अभ्यर्थी लंबे समय से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपनी शिकायतें और मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन का रास्ता अपनाया था।
उनके मुताबिक, इन प्रदर्शनों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं, बल्कि रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। आंदोलन के दौरान कई छात्रों और छात्र नेताओं पर विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए हैं।
सीता सोरेन ने आशंका जताई कि आपराधिक मुकदमों के कारण सरकारी नौकरी के सत्यापन के दौरान इन अभ्यर्थियों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों से आने वाले युवाओं के लिए ऐसी स्थिति उनके भविष्य पर गंभीर असर डाल सकती है। इसलिए सरकार को मामलों की समीक्षा कर मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।