भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकाल रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने हमीदिया अस्पताल परिसर में ही रोक दिया। डॉक्टरों ने हमीदिया के गेट नंबर-1 से CM हाउस की ओर जाने की तैयारी की थी, लेकिन पुलिस ने अस्पताल के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए। मौके पर भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं।
चारों तरफ पुलिस बल, वाटर कैनन तैनात
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रिजर्व पुलिस बल के साथ वाटर कैनन और पुलिस के अन्य वाहन भी मौके पर तैनात किए गए हैं। एसडीएम समेत कई प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और डॉक्टरों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
इमरजेंसी गेट भी किया ब्लॉक
मार्च शुरू होने से पहले ही पुलिस ने अस्पताल परिसर की घेराबंदी कर दी। बाहर जाने वाले रास्तों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि इमरजेंसी गेट को भी ब्लॉक कर दिया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांग रखना चाहते थे।
₹14,337 मिल रहा, ₹30 हजार की मांग
इंटर्न डॉक्टरों को वर्तमान में ₹14,337 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। डॉक्टर इसे बढ़ाकर न्यूनतम ₹30 हजार करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि करीब डेढ़ महीने पहले स्टाइपेंड बढ़ाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इसका लिखित आदेश जारी नहीं हुआ।
‘अब आश्वासन नहीं, लिखित आदेश चाहिए’
इंटर्न डॉक्टर मोहित मिश्रा ने कहा कि उन्होंने पहले संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखी, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर CM हाउस तक मार्च का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अब सिर्फ घोषणा या मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक लिखित आदेश चाहते हैं।
यूपी का उदाहरण देकर MP सरकार से सवाल
मोहित मिश्रा के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹25 हजार किए जाने का आदेश जारी हो चुका है। ऐसे में मध्य प्रदेश में भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में करीब 2 हजार शासकीय इंटर्न डॉक्टर हैं और कुल संख्या करीब 3,600 है।
लिखित आदेश तक जारी रहेगा प्रदर्शन
इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मुख्यमंत्री खुद आकर स्टाइपेंड वृद्धि का लिखित आदेश नहीं देते, तब तक वे हमीदिया अस्पताल परिसर में ही बैठे रहेंगे। उनका कहना है कि अब आंदोलन का अगला कदम सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा।