महिला दिवस का इतिहास
महिला दिवस की शुरुआत 1908 में हुई थी, पहले महिलाओं का सफर और भी कठिन था। एक समय था जब महिलाओं को न तो शिक्षा का अधिकार था, न ही वोट देने का और न ही उन्हें पुरुषों के बराबर माना जाता था। इस असमानता के खिलाफ न्यूयॉर्क में 15,000 महिलाओं ने बेहतर कामकाजी, मताधिकार और समान अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद 1910 में कोपेनहेगन में क्लारा जेटकिन नामक समाजवादी कार्यकर्ता ने एक अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया। 1911 में पहली बार ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में इसे आधिकारिक रूप से मनाया गया। आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
महिला दिवस पर देखें ये फिल्में..
महिलाओं की भूमिका सदियों से चर्चा का विषय रही है। परंपरागत रूढ़ियों, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक बंधनों के बावजूद, आज की महिलाएं अपनी पहचान स्वयं बना रही हैं। को दर्शाने वाली फिल्में एक महत्वपूर्ण मंच बन चुकी हैं। ऐसी ही 10 फिल्में, जो महिलाओं के जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं
बॉलीवुड जो समाज में अपनी छाप हमेशा छोड़ने में कामयाब परेशानियां, संघर्ष, उपलब्धियाँ, स्वाभिमान और उनकी दिक्कतों को उजागर करने के साथ-साथ सिनेमा ने महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक भी किया है। तो आइए जानें ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में जो महिलाओं के संघर्ष और जीवन पर आधारित हैं।
नीरजा
"नीरजा" एक प्रेरणादायक बायोपिक है जो 1986 की एक विमान अपहरण घटना पर आधारित है। यह फिल्म साहस को दर्शाती है जिसका निर्देशन राम माधवानी ने किया और यह 23 साल की लड़की के जीवन पर आधारित एक असली कहानी पर बनीं हुई फिल्म है जो कि 1986 में 4 आतंकवादियों के चंगुल से 359 यात्रियों की जान बचाने में सफल होती है लेकिन उनकी जान चली जाती है। इस फिल्म में नीरजा को रोल सोनम कपूर ने बखूबी निभाया है।
इंग्लिश विंग्लिश
श्रीदेवी की फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश 2012 में रिलीज हुई थी। जिसे गौरी शिंदे ने निर्देशित किया था। इस फिल्म की कहानी ने दर्शकों के दिलों को छू लेने वाली और आज के कई युवा अपनी बिजी लाइफ में अपनी मां को भूल जाते हैं। उन्हें कहीं भी ले जाना शर्मनाक समझते है। अपनी मां का सम्मान करना चाहिए इससे रिलेटेबल है।
फिल्म में एक आम गृहिणी की कहानी है जिसकी कद्र उसके अपने परिवार वाले नहीं करते। फिर वह अमेरिका अपने रिश्तेदार की शादी में जाती है, वहां इंग्लिश क्लासेज लेती है। इस एक बदलाव से उसका खुद पर भरोसा जागता है, वह कांफिडेंट हो जाती है। फिल्म के अंत में उसके परिवार वाले भी उसकी अहमियत को समझते हैं।
मदर इंडिया
1957 में रिलीज हुई नरगिस दत्त की फिल्म 'मदर इंडिया' हिंदी सिनेमा जगत की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है। यह फिल्म एक सशक्त महिला के जीवन को दर्शाती है, जो हर हाल में अपने परिवार और बच्चों के लिए संघर्ष करती है। फिल्म में राधा का किरदार निभा रहीं नरगिस दत्त, जीवन के तमाम कठिनाइयों और मुश्किलों का डटकर सामना करती हैं।
अपने बच्चों की परवरिश करते हुए वह उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन देती हैं। लेकिन फिल्म के अंत में जब उनका बेटा गलत रास्ते पर चलता है और अपराध करता है, तो राधा, एक मां होने के बावजूद, उसे भी माफ नहीं कर पाती। इस फिल्म ने महिलाओं के दृढ़ संकल्प, साहस और ममता को दर्शाया है। 'मदर इंडिया' को महबूब खान ने निर्देशित किया था, और यह फिल्म भारतीय सिनेमा की एक अमूल्य धरोहर मानी जाती है।
लापता लेडीज
साल 2023 1 मार्च को सिनेमाघर में रिलीज होने वाली फिल्म 'लापता लेडीज' जिसे किरण राव ने निर्देशित किया। लेकिन इसकी कहानी महिलाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाती है। ग्रामीण भारत में मौजूद पर्दा, बाल विवाह साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनना चाहिए, इस बात की सीख भी फिल्म ‘लापता लेडीज’ देती है। यह फिल्म महिला सशक्तिकरण की बात को बहुत ही बहुत ही खूबसूरती और सरल ढंग से कह देती है।