19 अगस्त को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत दबाव के साथ हुई। सेंसेक्स करीब 100 अंक गिरकर 77,100 के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी भी करीब 50 अंक नीचे 24,100 के स्तर पर है। शुरुआती कारोबार में मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में ज्यादा बिकवाली देखने को मिल रही है।बाजार में यह कमजोरी ऐसे समय आई है, जब इससे एक दिन पहले भी भारतीय बाजार गिरावट के साथ बंद हुए थे। इसके अलावा एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं।
मेटल और ऑटो शेयरों पर दबाव
बुधवार के कारोबार में मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का दबाव ज्यादा नजर आ रहा है। इससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर असर पड़ा है।निवेशकों की नजर अब दिनभर के कारोबार में सेक्टरवार उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख
भारतीय बाजार के लिए एशियाई बाजारों से संकेत पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहे। दक्षिण कोरिया का KOSPI, जापान का Nikkei और हांगकांग का Hang Seng अलग-अलग दिशा में कारोबार करते नजर आए।
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इंडेक्स |
लेवल |
बदलाव |
|---|---|---|
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KOSPI |
6,491 |
-363 (-5.56%) |
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Nikkei |
65,724 |
-1,736 (-2.57%) |
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Hang Seng |
25,487 |
+16 (+0.15%) |
अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए
18 अगस्त को अमेरिकी शेयर बाजार में भी कमजोरी रही। Nasdaq में 1.33% की गिरावट दर्ज की गई। S&P 500 भी 0.69% नीचे रहा, जबकि Dow Jones में 0.22% की गिरावट आई।
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इंडेक्स |
लेवल |
बदलाव |
|
Dow Jones |
53,343 |
-116 (-0.22%) |
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Nasdaq |
26,290 |
-355 (-1.33%) |
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S&P 500 |
7,692 |
-53 (-0.69%) |
7 दिन में FII ने 886 करोड़ रुपए के शेयर बेचे
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का एक पहलू बनी हुई है। पिछले 7 दिनों में FII/FPI ने भारतीय शेयर बाजार में 886 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं।इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII लगातार खरीदारी कर रहे हैं। पिछले 7 दिनों में DII की खरीदारी 12,390 करोड़ रुपए रही है।
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निवेशक |
ताजा आंकड़ा |
बीते 7 दिन |
बीते 30 दिन |
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DII |
+2,579 करोड़ |
+12,390 करोड़ |
+37,447 करोड़ |
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FII/FPI |
+1,652 करोड़ |
-886 करोड़ |
+3,121 करोड़ |
एक दिन पहले भी बाजार में बड़ी गिरावट
18 अगस्त को सेंसेक्स 493 अंक टूटकर 77,235 के स्तर पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 133 अंक गिरा और 24,155 पर बंद हुआ।अब बुधवार के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि शुरुआती कमजोरी आगे भी कायम रहती है या बाजार निचले स्तरों से रिकवरी करता है।