नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ और भूस्खलन से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। सीमा के पास चोचेन नदी और पुरेपु सांगपो नदी के संगम के नजदीक बनी एक और झील फट गई है। चीन ने इसके फटने की आशंका एक दिन पहले ही जताई थी। झील टूटने के बाद इलाके में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है, जिसके चलते नेपाल के रसुवा जिले में राहत और बचाव अभियान को 90 मिनट के लिए रोकना पड़ा।
खतरे को देखते हुए भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के आसपास बसे कई गांवों को खाली कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों के साथ सुरक्षाकर्मियों को भी तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
चीन में भी राहत अभियान रोका, लेवल-4 अलर्ट
बाढ़ के खतरे को देखते हुए चीन ने तिब्बत में भी राहत और बचाव अभियान रोक दिया है। प्रशासन ने लेवल-4 अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों को आशंका है कि दोबारा बाढ़ आने से हालात और गंभीर हो सकते हैं।
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल और तिब्बत में अब तक 478 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग लापता हैं। लापता लोगों में करीब 290 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
नेपाल में 475 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 977 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 517 विदेशी नागरिक, 45 नेपाली सेना के जवान और 41 नेपाल पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं तिब्बत में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि 558 लोग लापता हैं। इनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
चीन ने ग्लेशियर टूटने को बताया संभावित वजह
चीन ने शुक्रवार को कहा कि नेपाल में बुधवार को आई अचानक बाढ़ की संभावित वजह ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर का टूटना हो सकती है। इसके बाद भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का प्रवाह बढ़ा और नेपाल-तिब्बत सीमा के बड़े हिस्से में तबाही मच गई।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों तथा सरकारी संस्थानों ने शुरुआती जांच की है। शुरुआती आकलन के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्र में ग्लेशियर टूटना इस आपदा की संभावित वजह हो सकती है।
शी जिनपिंग ने बुलाई बैठक, राहत अभियान तेज करने पर जोर
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक बुलाकर तिब्बत-नेपाल सीमा पर बाढ़ से पैदा हुए हालात की समीक्षा की। बैठक में राहत और बचाव अभियान तेज करने तथा प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर चर्चा हुई।
शी जिनपिंग और अन्य नेताओं ने हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मिनट का मौन रखा। लापता चीनी और विदेशी नागरिकों की तलाश के लिए हरसंभव प्रयास करने का फैसला भी लिया गया।
सेना के राहत केंद्रों के बाहर अपनों की तलाश
नेपाल में बाढ़ के बाद शुक्रवार को सेना के राहत केंद्रों के बाहर लापता लोगों के परिजन अपने अपनों की तलाश करते नजर आए। दीवारों पर लापता लोगों के नाम और जन्मतिथि वाले कागज चिपकाए गए हैं। कुछ लोग सैनिकों को अपने परिजनों के नाम और फोन नंबर भी दे रहे हैं।
सेना के जनरल राजाराम बसनेत के मुताबिक, गुरुवार को रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी से करीब 900 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें 119 विदेशी नागरिक थे—92 भारतीय, 13 चीनी, 8 कोरियाई, 2 इतालवी और 2 अमेरिकी नागरिक।
हालांकि, सैकड़ों नेपाली अब भी लापता हैं। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि विदेशी नागरिकों को बचाने पर अधिक ध्यान दिया गया। बसनेत ने कहा कि उन्होंने इससे पहले इतनी बड़ी आपदा नहीं देखी। आने वाले दिनों में बारिश राहत और बचाव अभियान को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है।