एमए चिदंबरम स्टेडियम में दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल का पहला दिन युवा भारतीय क्रिकेट प्रतिभाओं के नाम रहा। मुकाबले से पहले सुर्खियों में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी थे, लेकिन दिन आगे बढ़ने के साथ 21 वर्षीय झारखंडी बल्लेबाज शिखर मोहन ने अपनी शानदार पारी से सारी महफिल लूट ली।
अपने डेब्यू दलीप ट्रॉफी मुकाबले में शिखर ने 85 रन की बेहतरीन पारी खेलकर ईस्ट जोन को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
वैभव ने सिराज को बनाया निशाना
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ईस्ट जोन को वैभव सूर्यवंशी और अनुभवी अभिमन्यु ईश्वरन ने जबरदस्त शुरुआत दी। सेमीफाइनल में 92 और 40 रन की पारियां खेलकर दलीप ट्रॉफी इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले वैभव ने फाइनल में भी अपना आक्रामक अंदाज जारी रखा।
साउथ जोन के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज के खिलाफ वैभव ने खुलकर शॉट खेले। उनके एक ओवर में वैभव ने कट, स्ट्रेट सिक्स और लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से चौका जड़कर अपना इरादा साफ कर दिया। दोनों सलामी बल्लेबाजों ने महज 88 गेंदों में 100 रन की साझेदारी पूरी कर ली।
हालांकि, उनकी तेजतर्रार पारी ज्यादा देर नहीं चली। चामा मिलिंद की उठती हुई गेंद पर पुल शॉट खेलने की कोशिश में वैभव कैच आउट हो गए। उन्होंने 37 गेंदों पर 44 रन बनाए।
रिजर्व ओपनर ने संभाली कमान
वैभव के आउट होने के बाद अभिमन्यु ईश्वरन भी रन आउट होकर पवेलियन लौट गए। ऐसे मुश्किल वक्त में ईस्ट जोन की पारी को संभालने की जिम्मेदारी रिजर्व ओपनर शिखर मोहन के कंधों पर आ गई।
रांची के 21 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज ने दबाव के बावजूद गजब का संयम दिखाया। यह उनका पहला दलीप ट्रॉफी मुकाबला था, लेकिन उनकी बल्लेबाजी में अनुभव की कमी बिल्कुल नजर नहीं आई।
शिखर का घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड भी उनकी प्रतिभा की कहानी कहता है। सीके नायडू ट्रॉफी 2023-24 में उन्होंने नौ पारियों में 77.88 की शानदार औसत से 623 रन बनाए थे। इसके बाद रणजी ट्रॉफी डेब्यू में झारखंड के लिए 12 पारियों में 55.73 की औसत से 613 रन बनाकर उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की।

स्पिनरों के खिलाफ दिखाया धैर्य
चेपॉक की पिच पर स्पिनरों त्रिपुराना विजय और श्रेयस गोपाल के सामने कई बल्लेबाजों को परेशानी हुई, लेकिन शिखर ने परिस्थिति के मुताबिक बल्लेबाजी की। उन्होंने अपनी 120 गेंदों की पारी में 81 डॉट गेंदें खेलीं, मगर खराब गेंद मिलने पर उसे बाउंड्री के पार पहुंचाने में कोई गलती नहीं की।
शिखर ने 85 रन की अपनी पारी में 54 रन सिर्फ चौकों-छक्कों से बनाए। उनकी पारी का अंत 85 रन पर हुआ, लेकिन तब तक वह ईस्ट जोन को 241/4 के मजबूत स्कोर तक पहुंचा चुके थे।
एक ओर जहां वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से शुरुआत में रोमांच पैदा किया, वहीं शिखर मोहन ने धैर्य, आक्रामकता और शानदार शॉट चयन के दम पर फाइनल के पहले दिन खुद को चर्चा का सबसे बड़ा नाम बना दिया।