नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में आई बाढ़ के बाद कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
898 कर्मचारी अब भी फंसे
जानकारी के मुताबिक, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में करीब 898 कर्मचारी अभी भी फंसे हुए हैं। राहत की बात यह है कि रेस्क्यू टीम अब तक 361 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल चुकी है। सुरंगों में फंसे बाकी लोगों तक पहुंचने के लिए मशीनों की मदद से मलबा और गाद हटाने का काम किया जा रहा है।
6 इंच के छेद से पहुंचाई हवा
त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में बचाव अभियान के दौरान एक छोटा रास्ता तैयार किया गया है। सुरंग में करीब 6 इंच का छेद कर पाइप डाला गया है, जिसके जरिए अंदर फंसे लोगों तक हवा पहुंचाई जा रही है। अब बचावकर्मी इस छेद को और बड़ा करके मैनहोल बनाने की तैयारी में हैं। इसके बाद रेस्क्यू टीम के लिए सुरंग के अंदर जाना और फंसे लोगों की तलाश करना आसान हो सकेगा।
मशीनों से हटाया जा रहा मलबा
सुरंग के आसपास जमा मिट्टी और गाद को हटाने के लिए मिनी एक्सकेवेटर समेत दूसरी मशीनों की मदद ली जा रही है। बचाव दल लगातार रास्ता साफ करने में जुटा है, ताकि सुरंग के भीतर पहुंचकर कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
बाढ़ में 734 लोगों की मौत
26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशुली नदी में अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नेपाल में बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तिब्बत में भी 16 लोगों की जान गई है। बाढ़ के बाद कई घरों को नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
भारत ने भेजी 68.5 टन राहत सामग्री
नेपाल की मदद के लिए भारत ने राहत सामग्री की खेप भेजी है। अब तक करीब 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है। इसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल और हाइजीन किट समेत जरूरी सामान शामिल हैं। इसके अलावा सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत ने टनल विशेषज्ञों, फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीमों को भी नेपाल भेजा है।
42 बेली ब्रिज बनाने में मदद
बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन्हें दोबारा जोड़ने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से कुल 42 बेली ब्रिज तैयार करने में मदद मांगी है। भारत की ओर से 230 फीट लंबे बेली ब्रिज के लिए जरूरी सामान नेपाल भेजा गया है। भारत जल्द ही सात और बेली ब्रिज के लिए सामग्री के साथ तकनीकी टीम भेजने की तैयारी में है। एलावेनी के मुताबिक, उन्हें उस समय अंदाजा नहीं था कि आगे इतनी बड़ी आपदा आने वाली है। उन्होंने कहा कि दर्शन नहीं हो सके, लेकिन वे और उनके साथ यात्रा कर रहे सभी लोग सुरक्षित अपने घर लौट सके। नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। सबसे बड़ी चुनौती सुरंगों में फंसे कर्मचारियों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।