बच्चेदानी में गांठ क्यों होती है?
आमतौर पर महिलाओं के मासिक चक्र के दौरान अंडाणु बनने के बाद फॉलिकल का आकार धीरे-धीरे छोटा हो जाता है। लेकिन कई बार यह फॉलिकल सिकुड़ता नहीं है और इसमें तरल पदार्थ भरने लगता है। यही स्थिति ओवेरियन सिस्ट का रूप ले लेती है। ज्यादातर मामलों में ये सिस्ट हानिकारक नहीं होते और समय के साथ अपने आप खत्म हो जाते हैं। लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें, बड़े आकार के हो जाएं या बार-बार दर्द और परेशानी देने लगें तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
ओवेरियन सिस्ट के प्रमुख लक्षण (Symptoms of Ovarian Cyst)
शुरुआती अवस्था में सिस्ट के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन जैसे-जैसे इनका आकार बढ़ता है, महिलाओं को कई परेशानियां महसूस होने लगती हैं। इनमें से कुछ आम लक्षण इस प्रकार हैं:- 1. पेट में सूजन या भारीपन महसूस होना। 2. मल त्याग या पेशाब के दौरान दर्द। 3. मासिक धर्म से पहले या दौरान पैल्विक दर्द। 4. संभोग के दौरान असहजता या दर्द। 5. पीठ के निचले हिस्से और जांघों में दर्द। 6. स्तनों में भारीपन या दर्द। 7. बार-बार चक्कर आना या बेहोशी महसूस होना। 8. तेज-तेज सांस लेना और थकान। 9. जी मिचलाना या उल्टी जैसा लगना। 10. कभी-कभी बुखार आना। इनमें से कोई भी लक्षण लगातार दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।ओवेरियन सिस्ट के कारण (Causes of Ovarian Cyst)
ओवरी में गांठ बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें से मुख्य हैं: 1. हॉर्मोनल असंतुलन – पीसीओडी (PCOD) और पीसीओएस (PCOS) जैसी स्थितियों में अक्सर ओवरी में सिस्ट बन जाते हैं। 2. फॉलिकल का न सिकुड़ना – पीरियड्स खत्म होने के बाद भी फॉलिकल का आकार कम न होना और तरल पदार्थ का जमा होना। 3. अनहेल्दी लाइफस्टाइल – ज्यादा जंक फूड, तनाव, नींद की कमी और व्यायाम न करना। 4. वजन का बढ़ना – मोटापा महिलाओं के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़कर ओवेरियन सिस्ट की संभावना बढ़ा देता है। 5. अनुवांशिक कारण – परिवार में किसी महिला को यह समस्या रही हो तो अगली पीढ़ी में इसका खतरा ज्यादा होता है।