आज के समय में ईयरबड्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। सफर के दौरान म्यूजिक सुनने से लेकर वर्कआउट और सोने से पहले पॉडकास्ट या गाने सुनने तक, लोग घंटों ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोगों को तो ईयरबड्स लगाकर सोने की आदत भी हो जाती है। धीमी आवाज में ऑडियो सुनते-सुनते नींद आ जाना भले ही आरामदायक लगे, लेकिन पूरी रात ईयरबड्स लगाए रखना कानों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। लंबे समय तक आवाज और ईयरबड्स के संपर्क में रहने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।
कानों पर लंबे समय तक पड़ता है आवाज का असर
रातभर ईयरबड्स लगाने का सबसे बड़ा concern यह है कि कान कई घंटों तक लगातार आवाज के संपर्क में रहते हैं। तेज आवाज में लंबे समय तक ऑडियो सुनने से सुनने की क्षमता प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है। दिन में थोड़ी देर म्यूजिक सुनने और कई घंटे लगातार ईयरबड्स इस्तेमाल करने में अंतर है। शुरुआत में समस्या महसूस न हो, लेकिन लंबे समय तक तेज आवाज सुनने की आदत कानों की संवेदनशील संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।
कान में सीटी या घंटी की आवाज
अगर ईयरबड्स इस्तेमाल करने के बाद कानों में सीटी, घंटी, भिनभिनाहट या गूंज जैसी आवाज सुनाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तेज आवाज के संपर्क से टिनिटस जैसी समस्या हो सकती है। अगर कानों में ऐसी आवाज बार-बार या लंबे समय तक बनी रहती है, तो ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है।
दर्द, दबाव और जलन की परेशानी
सोते समय करवट बदलने पर ईयरबड्स कान के अंदर दब सकते हैं। इससे कान में दर्द, दबाव, खुजली या जलन जैसी परेशानी हो सकती है। इन-ईयर ईयरबड्स लंबे समय तक कान के अंदर रहने से कान के आसपास की त्वचा में भी irritation हो सकती है। खासतौर पर अगर ईयरबड्स कान में ठीक से फिट न हों, तो सोते समय परेशानी और बढ़ सकती है।
बढ़ सकता है कान में संक्रमण का खतरा
लंबे समय तक ईयरबड्स लगाए रखने से कान के आसपास गर्मी और नमी बनी रह सकती है। अगर ईयरबड्स की नियमित सफाई नहीं की जाती, तो उन पर मौजूद गंदगी और बैक्टीरिया कान के संपर्क में आ सकते हैं। इससे कुछ लोगों में बाहरी कान के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए ईयरबड्स को साफ रखना और उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर न करना जरूरी है।
नींद की क्वालिटी भी हो सकती है प्रभावित
ईयरबड्स लगाकर सोने का असर सिर्फ कानों तक सीमित नहीं हो सकता। लगातार चल रहा ऑडियो, नोटिफिकेशन या आवाज में अचानक बदलाव नींद को बाधित कर सकता है। कई बार व्यक्ति को इसका तुरंत एहसास नहीं होता, लेकिन बार-बार नींद टूटने या नींद की गुणवत्ता खराब होने से अगले दिन थकान और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।
ईयरबड्स की जगह अपनाएं ये तरीके
अगर आपको सोते समय कुछ सुनने की आदत है, तो ईयरबड्स की जगह फोन या स्पीकर को बिस्तर से थोड़ी दूरी पर रखकर कम आवाज में ऑडियो चला सकते हैं। ऑडियो को पूरी रात चलाने के बजाय स्लीप टाइमर या ऑटो-ऑफ फीचर का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। सबसे अच्छा तरीका यही है कि सोने से पहले कानों को आराम दिया जाए और ईयरबड्स निकालकर सोया जाए।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर ईयरबड्स इस्तेमाल करने के बाद कानों में लगातार सीटी या भिनभिनाहट, दर्द, सुनने में कमी, कान से पानी या पस आने जैसी समस्या हो, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर या ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।