बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। उन्हें प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा है। मान्यता है कि बप्पा की आराधना से बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि-विवेक का आशीर्वाद मिलता है।
1. पूजा घर में एक से ज्यादा प्रतिमा न रखें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर के मंदिर में भगवान गणेश की एक ही प्रतिमा रखना उचित माना जाता है। अगर नई प्रतिमा स्थापित करनी हो, तो पहले से मौजूद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक रखने या विसर्जित करने की व्यवस्था परिवार की परंपरा के अनुसार करनी चाहिए।
2. गणेश जी की पीठ घर की ओर न हो
गणपति की प्रतिमा स्थापित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि उनकी पीठ सीधे घर के मुख्य हिस्से की ओर न हो। प्रतिमा ऐसी जगह रखें, जहां पूजा करते समय उनका मुख आसानी से दिखाई दे। धार्मिक परंपराओं में गणेश जी की पीठ को लेकर विशेष मान्यताएं जुड़ी हैं।
3. तुलसी नहीं, दूर्वा करें अर्पित
गणेश पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व है। भगवान गणेश को ताजी और साफ दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है। वहीं धार्मिक परंपरा में गणेश जी को तुलसी पत्र नहीं चढ़ाने की मान्यता है। इसके पीछे तुलसी और गणेश जी से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है।
4. पूजा में लाल रंग को दें प्राथमिकता
गणपति पूजा में लाल रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। लाल फूल, सिंदूर और वस्त्र पूजा में शामिल किए जा सकते हैं। गुड़हल के फूल भी गणेश जी को प्रिय माने जाते हैं। कई परंपराओं में पूजा के दौरान काले रंग से बचने की सलाह दी जाती है।
5. घर के लिए बाईं सूंड वाले गणेश
घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते समय सूंड की दिशा पर भी ध्यान दिया जाता है। आमतौर पर गृहस्थ जीवन के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा को अनुकूल माना जाता है। विधि-विधान से पूजा करने से सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
गणेश उत्सव में रखें श्रद्धा का ध्यान
गणेश उत्सव के दौरान पूजा में नियमों के साथ श्रद्धा और स्वच्छता का भी ध्यान रखना जरूरी है। धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं, इसलिए अपने परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा करना बेहतर है।